गुरु सोइ जो विपिन बसावे - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (137)

गुरु सोइ जो विपिन बसावे - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (137)

गुरु सोइ जो विपिन बसावे, गुरु सोइ जो हरिहि मिलावै।
या करनी विन गुरु न कहावै ।।

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (137)

रसिक गुरु वह है जो अपने शिष्य के लिए अपना सारा प्रयास करता है और उसे वृंदावन में निवास कराता है और श्यामाश्याम की प्राप्ति कराता है। ऐसा किए बिना, उन्हें 'रसिक गुरु' नहीं कहा जा सकता है।