(कवित्त)
सुर रखवारी सुर राज रखवारी,
शुक शम्भु रखवारी रवि चन्द्र रखवारी है। [1]
रिसि रखवारी विधि वेद रखवारी,
गिरिजा ने करी कीरति की कीरति सुधारी है॥ [2]
दिग रखवारी दिगपाल रखवारी,
लोक थोक रखवारी गावैं धराधर धारी है। [3]
ब्रज रखवारी ब्रजराज रखवारी ‘हठी’,
जन रखवारी वृषभानु की दुलारी है॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (89)
श्री राधा स्वर्ग के देवताओं की संरक्षक हैं और स्वर्ग के अधिपति इंद्र की भी रक्षा करती हैं। वे श्री शुकदेव, भगवान शिव, सूर्यदेव और चंद्रमा की भी रक्षक हैं। [1]
वह ऋषियों, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और वेदों की भी संरक्षिका हैं। कीर्ति-कुमारी श्री राधा की कृपा से ही गिरिजा (पार्वती जी) का अस्तित्व संभव हुआ है। [2]
वह अपने आश्रित देवताओं के साथ-साथ चारों दिशाओं की भी रक्षिका हैं। उनकी महिमा पूरे विश्व की आधारशिला के रूप में गाई जाती है। [3]
श्री हठी जी कहते हैं कि वह ब्रज एवं ब्रजवासियों की रक्षा करती हैं और ब्रजराज श्री कृष्ण की भी रक्षा करती हैं। वे अपने प्रियजनों की रक्षा करने वाली श्री वृषभानु दुलारी श्री राधा हैं। [4]
सुर रखवारी सुर राज रखवारी,
शुक शम्भु रखवारी रवि चन्द्र रखवारी है। [1]
रिसि रखवारी विधि वेद रखवारी,
गिरिजा ने करी कीरति की कीरति सुधारी है॥ [2]
दिग रखवारी दिगपाल रखवारी,
लोक थोक रखवारी गावैं धराधर धारी है। [3]
ब्रज रखवारी ब्रजराज रखवारी ‘हठी’,
जन रखवारी वृषभानु की दुलारी है॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (89)
श्री राधा स्वर्ग के देवताओं की संरक्षक हैं और स्वर्ग के अधिपति इंद्र की भी रक्षा करती हैं। वे श्री शुकदेव, भगवान शिव, सूर्यदेव और चंद्रमा की भी रक्षक हैं। [1]
वह ऋषियों, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और वेदों की भी संरक्षिका हैं। कीर्ति-कुमारी श्री राधा की कृपा से ही गिरिजा (पार्वती जी) का अस्तित्व संभव हुआ है। [2]
वह अपने आश्रित देवताओं के साथ-साथ चारों दिशाओं की भी रक्षिका हैं। उनकी महिमा पूरे विश्व की आधारशिला के रूप में गाई जाती है। [3]
श्री हठी जी कहते हैं कि वह ब्रज एवं ब्रजवासियों की रक्षा करती हैं और ब्रजराज श्री कृष्ण की भी रक्षा करती हैं। वे अपने प्रियजनों की रक्षा करने वाली श्री वृषभानु दुलारी श्री राधा हैं। [4]

