प्रथम नाम हरिवंश हित, रट रसना दिन रैन।
प्रीति रीति तब पाइयै, अरु वृंदावन ऐन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (1)
श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं—हे जिह्वा! तू सर्वप्रथम प्रेममूल श्री हित हरिवंश नाम का ही सतत जप कर, उसी परम मधुर नाम का ही गान कर; क्योंकि इस नाम की रटन के फलस्वरूप ही श्री हित युगल की अद्भुत प्रीति-रीति तथा श्री वृन्दावनरूपी विश्राम की प्राप्ति होगी।
प्रीति रीति तब पाइयै, अरु वृंदावन ऐन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (1)
श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं—हे जिह्वा! तू सर्वप्रथम प्रेममूल श्री हित हरिवंश नाम का ही सतत जप कर, उसी परम मधुर नाम का ही गान कर; क्योंकि इस नाम की रटन के फलस्वरूप ही श्री हित युगल की अद्भुत प्रीति-रीति तथा श्री वृन्दावनरूपी विश्राम की प्राप्ति होगी।

