वृन्दारण्योत्तमं नास्ति-नास्ति मत्तोऽधमं क्वचित्।
राधा नाम्नः प्रभावेण-यदि स्यान्मेलनं तयोः।।
- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.125)
श्रीवृन्दावन से अधिक श्रेष्ठ (अधम-उद्धारक) और कोई नहीं है, एवं मेरे समान अधम और कोई नहीं है। ‘श्रीराधा श्रीराधा’ नाम रटने के प्रभाव से यदि इन दोनों का (श्रीवृन्दावन और मेरा) संयोग हो जाय (तो हो सकता है अन्यथा) 'श्रीराधा श्रीराधा' नाम के बिना श्रीवृन्दावन का संयोग व वास कदापि नहीं हो सकता ।
राधा नाम्नः प्रभावेण-यदि स्यान्मेलनं तयोः।।
- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.125)
श्रीवृन्दावन से अधिक श्रेष्ठ (अधम-उद्धारक) और कोई नहीं है, एवं मेरे समान अधम और कोई नहीं है। ‘श्रीराधा श्रीराधा’ नाम रटने के प्रभाव से यदि इन दोनों का (श्रीवृन्दावन और मेरा) संयोग हो जाय (तो हो सकता है अन्यथा) 'श्रीराधा श्रीराधा' नाम के बिना श्रीवृन्दावन का संयोग व वास कदापि नहीं हो सकता ।

