सहस्रदलपद्मस्य वृंदारण्यं वराटकम्  - पद्मपुराणम्/खण्डः ५ (पातालखण्डः)/अध्यायः ०६९ पद ७०

सहस्रदलपद्मस्य वृंदारण्यं वराटकम् - पद्मपुराणम्/खण्डः ५ (पातालखण्डः)/अध्यायः ०६९ पद ७०

सहस्रदलपद्मस्य वृंदारण्यं वराटकम्
यस्य स्पर्शनमात्रेण पृथ्वी धन्या जगत्त्रये

- पद्मपुराणम्/खण्डः ५ (पातालखण्डः)/अध्यायः ०६९ पद ७०

सहस्त्र पंखुड़ियों से युक्त कमल का मध्य कोष वृन्दावन है। उसके स्पर्श-मात्र से पृथ्वी तीनों लोकों में धन्य हुई है।