नैंन न मूँदे ध्यानकौं - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (21)

नैंन न मूँदे ध्यानकौं - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (21)

नैंन न मूँदे ध्यानकौं, किये न अंगनि-न्यास।
नाँचि गाई रासहिं मिले, बसि वृंदावन व्यास॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (21)

न तो मैंने आँखें बंद करके ध्यान किया और न ही कोई उपवास या तपस्या की। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं—केवल नृत्य और कीर्तन करके, रसिकों के संग में वृन्दावन में निवास करने से ही दिव्य युगल तथा रास-रस की प्राप्ति हो गई।