श्रीराधा दे वृन्दावन वास - श्री रूप सखी जी, श्री रूप सखी जी की वाणी

श्रीराधा दे वृन्दावन वास - श्री रूप सखी जी, श्री रूप सखी जी की वाणी

(राग विहागरौ)
श्रीराधा दै वृन्दावन वास ।
जुगल स्वरूप सदा अवलोकौं, रंग भरयौं रस हास ।।
रसिक-सिरोमनि श्रीहरिदासी, ललित सु निरखैं रास ।
जमुना-तीर तरू लता छाई, अद्भुत प्रेम प्रकास ।।

- श्री रूप सखी जी, श्री रूप सखी जी की वाणी, सिद्धांत के पद (92)

हे श्री नित्य बिहारिनि श्री राधा, अब तो मुझे आप वृंदावन वास दीजिए । नित्य ही मैं युगल स्वरूप का अवलोकन करूं एवं रंग हास में परायण रहकर, आपकी नित्य निष्काम सेवा करूं। श्री रूप सखी जी कहते हैं कि ऐसा कब होगा कि रसिक शिरोमणि ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी महाराज के संग में, यमुना किनारे, तरु छाया लताओं के मध्य, जहां अद्भुत प्रेम रस का नित्य ही प्रकाश होता है, वहां युगल दर्शन एवं रास को मैं निरखूंगा?