कोऊ उमाराज रमाराज जमाराज कोऊ - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (5)

कोऊ उमाराज रमाराज जमाराज कोऊ - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (5)

(कवित्त)
कोऊ उमाराज रमाराज जमाराज कोऊ,
कोऊ रामचन्द्र सुख कंद नाम नाधे में। [1]
कोऊ ध्यावै गजपति फनपति सुरपति कोऊ,
देव ध्याय फल लेत पल आधे में॥ [2]
‘हठी’ को आधार निराधार कौ आधार तू ही,
जप तप जोग जग्य कछवै न साधे में। [3]
कटैं कोटि बाधे मुनि धरत समाधि ऐसे,
राधे पद रावेरे सदा अवराधे में॥ [4]

- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (5)

कोई भगवान शिव, भगवान विष्णु, यहाँ तक कि मृत्यु के देवता यमराज का स्मरण करता है, तो कोई भगवान राम को पुकारता है, जिनका नाम आनंद का स्रोत है। [1]

कोई भगवान गणेश, भगवान अनंत, या इंद्र का ध्यान करता है, जिससे वे जल्द ही मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। [2]

परंतु श्री हठीजी कहते हैं कि उनका आधार केवल एक प्यारी श्री राधारानी हैं, जो निराधार जीवों का भी आधार हैं, अर्थात् उन जीवों का भी साथ देती हैं जिनका कोई नहीं है। उन श्री राधा की भक्ति में वे जप, योग, तपस्या, यज्ञ इत्यादि का त्याग कर देते हैं। [3]

श्री राधारानी की कृपा प्राप्त कर ही मुनिजन समाधि तक पहुँच पाते हैं क्योंकि श्री राधा ही कोटि बाधाओं को दूर करने वाली हैं। इसलिए, हे प्यारी श्री राधारानी, मैं तो अनन्य भाव से केवल आपके चरणों की ही भक्ति करता हूँ। [4]