राधा-राधा कहत है - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक

राधा-राधा कहत है - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक

राधा-राधा कहत है, जे नर आठो याम।
ते भव सिंधु उलंघी के, बसत सदाँ ब्रजधाम॥

-  श्री हठी जी, राधा सुधा शतक

जो मनुष्य हर काल में “राधा-राधा” का जप करता है, वह जन्म-मरण के सागर में डूबने से बच जाता है और सीधे दिव्य धाम ब्रज-वृन्दावन में पहुँच जाता है।