नित ही राधाकृष्ण हैं - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (171)

नित ही राधाकृष्ण हैं - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (171)

नित ही राधाकृष्ण हैं, नित्य सु विपिन विलास।
कोटि-कोटि गोलोक लो, एक पत्र प्रकाश॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (171)

श्री राधा-कृष्ण नित्य हैं और श्री वृन्दावन भी नित्य है। अनंत-कोटि गोलोक भी श्री वृन्दावन के एक पत्र के प्रकाश की समानता नहीं कर सकते।