मोहि अति लागत श्री बन नीकौ - श्री वल्लभ दास जी

मोहि अति लागत श्री बन नीकौ - श्री वल्लभ दास जी

[राग हमीर]
मोहि अति लागत श्री बन नीकौ।
बिकसित कुसुम सुबासित चहुँ दिसि सुन्दर शब्द अली कौ।
बोलत सुकपिक, डोलत खग मृग अद्भुत नृत्य सिखी कौ ॥
बल्लभ कृष्ण जदपि सुख सागर, प्रिया बिना सब फीकौ ॥

- श्री वल्लभ दास जी

मुझे श्री वृंदावन अति प्रिय है ! अत्यंत सुंदर फूल खिल रहे हैं, चारों तरफ से सुगंध आ रही है और भ्रमरों की गुंजार से सारा वातावरण गूंज रहा हैं। तोते और बुलबुल मधुर गान कर रहे हैं और हिरण समूह विचरण कर रहे हैं और पक्षी चारों ओर हैं। मोर अपने अद्भुत नृत्य का प्रदर्शन कर रहे हैं। श्री वल्लभदास कहते हैं, "यदपी भगवान श्रीकृष्ण समस्त सुख सागर हैं, लेकिन श्री राधारानी के बिना, उनका रस, आनंद इत्यादि बेस्वाद और फीका हैं।"