राजत निकुंज धाम ठकुरानी - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

राजत निकुंज धाम ठकुरानी - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

(राग देस)
राजत निकुंज धाम ठकुरानी।।
कुसुम सेज पर पौढ़ी प्यारी राग सुनत मृदु बानी।
बैठी ललिता चरण पलोटत, लाल दृष्टि ललचानी।
पाएं परत सजनी के मोहन हित सो हाहा खानी।
भई कृपालु लाल पर ललिता दे आग्या मुसकानी ।
आओ मोहन चरण पलोटो जैसे कुँवरी न जानी।
आग्या दई सखी की प्यारी मुख ऊपर पट तानी ।
बीना बजाय गाय कछु तानन ज्यौं उपजे सुखसानी ॥
गावन लगे रसिक मनमोहन तब जानी महारानी ।
उठ बैठी व्यास की स्वामिनी श्री वृन्दावन रानी ॥

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

वृंदावन के निकुंज में श्री राधारानी कुसुम की सेज पर बिराज रही हैं और श्री ललिता जी सुन्दर राग गा रही हैं एवं उनके चरण दबा रही हैं । यह सब देखते हुए श्री श्यामसुंदर ललचा रहे हैं। श्याम सुंदर ललिता जी से विनती करते हैं कि उनको भी यह सेवा करने का अवसर प्राप्त हो। यह सुनकर कृपालु श्री ललिता सखी श्री श्याम सुंदर को ऐसा करने का अवसर देती हैं। परंतु उनको कहती है कि वह ऐसे चरण दबाए जिससे उन्हें राधा रानी पहचान ना सकें। तुरंत श्याम सुंदर गायन करने लगते हैं एवं चरण दबाने हैं एवं अत्यंत रस बरसता है। परंतु गायन करते ही श्री राधा रानी को पता लग जाता है कि स्वयं श्याम सुंदर ही हैं जो उनकी सेवा कर रहे हैं। विशाखा अवतार श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि तुरंत उसके पश्चात उनकी स्वामिनी वृंदावन धाम की रानी श्री राधा रानी उठ कर बैठ जाती हैं।