अहो किशोरी स्वामिनी, गोरी परम दयाल।
तनिक कृपा की कोर लखि, कीजै मोहि निहाल॥
- ब्रज के दोहे
हे मेरी परम दयामयी गौरवर्णी किशोरी स्वामिनी! आप करुणा की साक्षात् मूर्ति हैं। मुझ पर भी अपनी करुणा भरी दृष्टि की एक सूक्ष्म सी कोर (कटाक्ष) डाल दीजिए और इस दीन जीव को कृतार्थ कर दीजिए।
तनिक कृपा की कोर लखि, कीजै मोहि निहाल॥
- ब्रज के दोहे
हे मेरी परम दयामयी गौरवर्णी किशोरी स्वामिनी! आप करुणा की साक्षात् मूर्ति हैं। मुझ पर भी अपनी करुणा भरी दृष्टि की एक सूक्ष्म सी कोर (कटाक्ष) डाल दीजिए और इस दीन जीव को कृतार्थ कर दीजिए।

