जय राधे जय राधे राधे - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (५३)

जय राधे जय राधे राधे - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (५३)

“जय राधे जय राधे राधे जय राधे जय श्री राधे ।
जय कृष्णा जय कृष्णा कृष्णा जय कृष्णा जय श्री कृष्णा” ।।1।।

श्री राधा और श्री कृष्ण की सदा जय हो ।

“श्यामा गोरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरि श्री राधे ।
रसिक रसिलो छैल छबीलो, गुण गर्विलो श्री कृष्णा” ।।2।।

श्री राधा: नित्य किशोरी हैं और अंग का वर्ण सुनहरा है ।
श्री कृष्ण: भक्ति भावना के प्रेम और नागरता से भरपुर, सभी अच्छे गुणों के साथ अति सुंदर सुकुमार ।

“रास विहारणी रस विस्तारणी, प्रिय उर धारणी श्री राधे ।
नव नव रंगी नवल त्रिभंगी, श्याम सुअंगि श्री कृष्णा” ।।3।।

श्री राधा: महारास में विहार करतीं हैं , शुद्ध प्रेम का विस्तार करतीं हैं और अपने ह्रदय में प्रिय धारण करती है।
श्री कृष्ण: श्री अंग में नित नविन रंगों का प्रकाश होता है , त्रिभंग मुद्रा में विराजमान हैं ।

“प्राण पियारी रूप उजारि, अति सुकुमारी श्री राधे ।
मैन मनोहर महामोदकर, सुन्दर वरतर श्री कृष्णा” ।।4।।

श्री राधा: वह श्री कृष्ण को उनके जीवन से अधिक प्रिय हैं, उनका रूप सुंदर है और प्रकाश से भरा है और वह बहुत प्यारी हैं।
श्री कृष्ण: वह कामदेव को भी मंत्रमुग्ध कर देते है, वह सब आनंद के दाता है और सबसे सुंदर वर है।

“शोभा श्रेणी मोहा मैनी, कोकिल वेणी श्री राधे ।
कीर्तिवन्ता कामनी कन्ता, श्री भगवन्ता श्री कृष्णा” ।।5।।

श्री राधा: वह प्रेम की देवी की तुलना में अधिक सुंदर है, और उनकी आवाज बुलबुल की तुलना में मधुर है।
श्री कृष्ण: वह सबसे प्रसिद्ध, राधा वर और लीला पुरुषोत्तम हैं।

“चन्दा वदनि कुन्दा रदनी, शोभा सदनी श्री राधे ।
परम उदारा प्रभा अपारा, अति सुकुमारा श्री कृष्णा” ।।6।।

श्री राधा: इनका चेहरा चंद्रमा की तरह है, इनके दन्त मल्लिका पुष्प कलियों की तरह हैं और वह सभी सुंदरता की खान है।
श्री कृष्ण: ये सबसे उदार, सबसे शक्तिशाली और बहुत प्यारे किशोर है।

“हंसा गमनी राजत रमणी, क्रीड़ा कमनी श्री राधे ।
रूप रसाला नयन विशाला, परम कृपाला श्री कृष्णा” ।।7।।

श्री राधा: इनकी चाल हंस की तरह है, ये लीला विस्तार करने वाली हैं और इनमें कई मीठे खेल और प्यार भरे आदान-प्रदान होते हैं।
श्री कृष्ण: इनकी सुंदरता आकर्षक और प्यारी है, इनकी आंखें विशाल रूप से विस्तृत हैं और ये सबसे दयालु उदार हैं।

“कञ्चन बेली रति रस रेली, अति अलबेली श्री राधे ।
सब सुख सागर सब गुण आगर, रूप उजागर श्री कृष्णा” ।।8।।

श्री राधा: वह एक सुनहरी लता की तरह है, प्रेम की अमृत हैं और अत्यंत आकर्षक है।
श्री कृष्ण: वह सभी आनंदों का सागर है और सभी अच्छे गुणों और अपार सुंदरता का खजाना है।

“रमणी रम्या तरुतर तम्या, गुण आगम्या श्री राधे ।
धाम निवासी प्रभा प्रकाशी, सहज सुहासी श्री कृष्णा” ।।9।।

श्री राधा: उनकी आवाज़ सबसे मधुर है और उनके गुण अतुलनीय और अप्राप्य हैं।
श्री कृष्ण: वह पवित्र क्षेत्र ब्रज में रहते है, उनका प्रकाश बहुत शक्तिशाली है और वह हमेशा स्वाभाविक रूप से मुस्कुराते रहते है।

“शक्त्याह्लादिनी अतिप्रिय वादिनी, उर उन्मादनी श्री राधे ।
अंग अंग टोना सरस सलोना, सुभग सुठोना श्री कृष्णा” ।।10।।

श्री राधा: वह आनंद की शक्ति का प्रतीक हैं, बहुत प्रेम से बोलती हैं और उनका ह्रदय पूरी तरह से हर्षित है।
श्री कृष्ण: वह हर अंग में मोहक और जादुई रूप से प्यारे हैं, उनका पूरा रूप अमृत से भरा है और वह सबसे आकर्षक है।

“राधा नामनी गुण अभिरामनी, हरि प्रिय स्वामिनी श्री राधे ।
हरे हरे हरि, हरे हरे हरि, हरे हरे हरि, श्री कृष्णा” ।।11।।

श्री राधे: उनका नाम श्री राधा है, वह सुंदर हैं क्योंकि सभी श्रेष्ठ गुणों से परिपूर्ण हैं और वे भगवान श्रीहरि की प्रिया हैं।
श्री कृष्ण: श्री कृष्ण सभी दुखों के निवारण करने वाले हैं, उनकी स्तुति करें, उनकी स्तुति करें, उनकी स्तुति करें।
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (५३)