हरिवंश चरण उर धरनि धरि, मन वच कै विस्वास।
कुँवरि कृपा ह्वै है तबहि, अरु वृन्दावन वास॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (8)
अतः पूरी श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के साथ श्री हित हरिवंश के चरण-कमलों को अपने हृदय में धारण करने पर निश्चित रूप से किशोरीजी हम पर कृपा करेंगी और श्री वृन्दावन धाम में वास की प्राप्ति होगी।
कुँवरि कृपा ह्वै है तबहि, अरु वृन्दावन वास॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (8)
अतः पूरी श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के साथ श्री हित हरिवंश के चरण-कमलों को अपने हृदय में धारण करने पर निश्चित रूप से किशोरीजी हम पर कृपा करेंगी और श्री वृन्दावन धाम में वास की प्राप्ति होगी।

