राग सारंग
कृपा अवलोकन दान दैरी ।
महादान वृषभानु कुमारी ।
तृषित लोचन चकोर मेरे तुव वदन इंदु किरन पान दैरी ।।
सब विध सुघर सुजान सुन्दरी सुनी विनती कान दैरी ।
गोविन्द प्रभु पिय चरन परस कहै याचक को तू मान दैरी ।।
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (47)
कृपया मुझे अपनी कृपा-दृष्टि का वरदान प्रदान करें! हे श्री वृषभानु दुलारी, वह सबसे बड़ा उपहार है, जिसे पाने के लिए मेरी आँखें चकोर पक्षी की तरह प्यासी हैं। अब मुझे अपने चन्द्रमा के समान मुख से अमृत किरणों का पान करने दीजिये। आप हर तरह से कुशल हैं, स्वभाव से मधुर और बहुत सुंदर हैं, इसलिए आप मेरी विनती सुनिये। कवि गोविंद दास श्री राधा के चरण छू कर कहते हैं "हे किशोरी जू, दरवाज़े पर आये भिखारी की याचना जरूर सुननी चाहिए" |
कृपा अवलोकन दान दैरी ।
महादान वृषभानु कुमारी ।
तृषित लोचन चकोर मेरे तुव वदन इंदु किरन पान दैरी ।।
सब विध सुघर सुजान सुन्दरी सुनी विनती कान दैरी ।
गोविन्द प्रभु पिय चरन परस कहै याचक को तू मान दैरी ।।
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (47)
कृपया मुझे अपनी कृपा-दृष्टि का वरदान प्रदान करें! हे श्री वृषभानु दुलारी, वह सबसे बड़ा उपहार है, जिसे पाने के लिए मेरी आँखें चकोर पक्षी की तरह प्यासी हैं। अब मुझे अपने चन्द्रमा के समान मुख से अमृत किरणों का पान करने दीजिये। आप हर तरह से कुशल हैं, स्वभाव से मधुर और बहुत सुंदर हैं, इसलिए आप मेरी विनती सुनिये। कवि गोविंद दास श्री राधा के चरण छू कर कहते हैं "हे किशोरी जू, दरवाज़े पर आये भिखारी की याचना जरूर सुननी चाहिए" |

