कोटि ब्रह्म ऐश्वर्यता, वैभवता की वारि।
व्यासदासकी कुंवरिकौ, अब को सकै निहारि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (32)
करोड़ों ब्रह्मांडों का ऐश्वर्य और समस्त वैभव तो श्री राधा जू की सुंदरता के ऊपर न्योछावर किया जा सकता है। श्री हरिराम व्यास जी की स्वामिनी जू के इस अपार लावण्य और माधुर्य को अब भला कौन पूर्ण रूप से निहार सकता है? उनकी शोभा के सम्मुख समस्त जगत का ऐश्वर्य फीका है।
व्यासदासकी कुंवरिकौ, अब को सकै निहारि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (32)
करोड़ों ब्रह्मांडों का ऐश्वर्य और समस्त वैभव तो श्री राधा जू की सुंदरता के ऊपर न्योछावर किया जा सकता है। श्री हरिराम व्यास जी की स्वामिनी जू के इस अपार लावण्य और माधुर्य को अब भला कौन पूर्ण रूप से निहार सकता है? उनकी शोभा के सम्मुख समस्त जगत का ऐश्वर्य फीका है।

