क्वाहं मूढ़मतिः क्व नाम - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (268)

क्वाहं मूढ़मतिः क्व नाम - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (268)

क्वाहं मूढ़मतिः क्व नाम परमानन्दैकसारं रसं श्रीराधाचरनानुभावकथया निस्यंदमाना गिरः।
लग्नाः कोमलकुंजपुंज विलसद्वृन्दाटवीमण्डले क्रीडच्छीवृषभानुजापदनखज्योतिश्छटाः प्रायशः।।

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (268)

कहाँ मन्द बुद्धि मैं और कहाँ श्री राधा चरणों के प्रभाव की कथा द्वारा निश्चित रूप से (नाम) परमानन्द के एकमात्र सार रस को प्रवाहित करने वाली (मेरी) वाणी ! (जो वाणी) कोमल कुंज समूह से शोभायमान श्रीवृन्दावन-मण्डल में संलग्न है (और जिसमें) विहार-परायण श्रीवृषभानुनन्दिनी के चरण नख की ज्योति की छटा प्रायः विद्यमान रहती है ।