मथुरा मण्डल रम्यं सर्वतीर्थ उत्तमोत्तम।श्यत्र वृन्दावनं रम्यं पञ्चयोजन विस्तृत।।
च ये मत्यस्तत्वज्ञास्तत्वदशिनः।कुर्वन्ति च वने पुन्ये प्राप्नुवन्ति पदं शुभम् ।।
- भगवान् शिव, पद्म पुराण
अर्थात- भगवान शंकर कहते हैं कि मथुरा-मंडल में श्रीवृन्दावन, जो पाँच योजन में फैला हुआ है, सभी उत्तम तीर्थों से भी उत्तम है । यहाँ पर और भी कुछ न हो सके तो केवल देह त्याग ही हो जाय, तब भी परम पद की इच्छानुसार प्राप्ति हो जाती है ।
च ये मत्यस्तत्वज्ञास्तत्वदशिनः।कुर्वन्ति च वने पुन्ये प्राप्नुवन्ति पदं शुभम् ।।
- भगवान् शिव, पद्म पुराण
अर्थात- भगवान शंकर कहते हैं कि मथुरा-मंडल में श्रीवृन्दावन, जो पाँच योजन में फैला हुआ है, सभी उत्तम तीर्थों से भी उत्तम है । यहाँ पर और भी कुछ न हो सके तो केवल देह त्याग ही हो जाय, तब भी परम पद की इच्छानुसार प्राप्ति हो जाती है ।

