श्री कुंजबिहारिणी लाड़ली - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (185)

श्री कुंजबिहारिणी लाड़ली - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (185)

श्री कुंजबिहारिणी लाड़ली, परम उदार कृपाल।
तोषत पोषत लाल कूँ, रसिक शिरोमणि बाल॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (185)

वृन्दावन की कुंजों में विहार करने वाली हे श्री प्यारी जू! आप अत्यंत उदार और दयालु हैं। आप श्रीकृष्ण को भी संतुष्ट एवं पोषित करती हैं, क्योंकि उस दिव्य प्रेम-राज्य की आप शिरोमणि हैं।