(कवित्त)
मखमल माखन से इन्दु की मयूखन से,
नूतन तमालपत्र आभा आभरन हैं। [1]
गुल से गुलाल से गुलाब जपा जावक से,
पावक प्रवाल लाल गावै भू धरन हैं॥ [2]
उमापति रमापति जमापति आठों याम,
ध्यावत रहत चारि फल के करन हैं। [3]
पंकज बरनि छबि छबिके हरन हठी,
सुख के करन राधे रावरे चरन हैं॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (4)
श्री राधा के चरण कमल मखमल से भी मुलायम हैं, मक्खन के समान कोमल और और चंद्रमा की किरणों जैसी शीतल है। उनकी शोभा तमाल वृक्ष के नवीन पत्तियों की सुंदरता को भी पराजित कर रही है। [1]
उन श्री चरणों का रंग गुलाल, गुलाब की पंखुड़ियों और लाल रंग के जावक के समान है, अथवा धधकती हुई अग्नि के रंग के समान लाल है जिनका गुणगान श्री शेष जी (जो अपने सिर पर पृथ्वी को धारण किए हैं) भी करते हैं । [2]
उमापति (शिव), रमापति (विष्णु), यमराज और अन्य देवता अष्टयाम (हर समय) आपके श्री चरणों का ही ध्यान करते रहते हैं, क्योंकि इन्हीं चरणों में चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का कारण निहित है। [3]
पंकज (कमल) भी आपके चरणों की शोभा के सामने फीका पड़ जाता है। श्री हठीजी कहते हैं, “हे राधे, आपके चरण समस्त सुखों के दाता हैं सुख के कारण और मोक्ष के दाता हैं। आपके चरणों की महिमा अपार है।” [4]
मखमल माखन से इन्दु की मयूखन से,
नूतन तमालपत्र आभा आभरन हैं। [1]
गुल से गुलाल से गुलाब जपा जावक से,
पावक प्रवाल लाल गावै भू धरन हैं॥ [2]
उमापति रमापति जमापति आठों याम,
ध्यावत रहत चारि फल के करन हैं। [3]
पंकज बरनि छबि छबिके हरन हठी,
सुख के करन राधे रावरे चरन हैं॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (4)
श्री राधा के चरण कमल मखमल से भी मुलायम हैं, मक्खन के समान कोमल और और चंद्रमा की किरणों जैसी शीतल है। उनकी शोभा तमाल वृक्ष के नवीन पत्तियों की सुंदरता को भी पराजित कर रही है। [1]
उन श्री चरणों का रंग गुलाल, गुलाब की पंखुड़ियों और लाल रंग के जावक के समान है, अथवा धधकती हुई अग्नि के रंग के समान लाल है जिनका गुणगान श्री शेष जी (जो अपने सिर पर पृथ्वी को धारण किए हैं) भी करते हैं । [2]
उमापति (शिव), रमापति (विष्णु), यमराज और अन्य देवता अष्टयाम (हर समय) आपके श्री चरणों का ही ध्यान करते रहते हैं, क्योंकि इन्हीं चरणों में चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का कारण निहित है। [3]
पंकज (कमल) भी आपके चरणों की शोभा के सामने फीका पड़ जाता है। श्री हठीजी कहते हैं, “हे राधे, आपके चरण समस्त सुखों के दाता हैं सुख के कारण और मोक्ष के दाता हैं। आपके चरणों की महिमा अपार है।” [4]

