अलख ब्रह्म अच्युत अगम, जाकौ ओर न छोर।
ताकौ करि काजर नयन, देत कृपा की कोर॥
- ब्रज के दोहे
वह अलख, अविनाशी और अगम्य ब्रह्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत, उन भगवान् श्री कृष्ण को श्री राधा ने अपनी आँखों का काजल बना लिया है अथवा उनपर अपनी कृपा-दृष्टि डाल सदा निहाल करती रहती हैं।
ताकौ करि काजर नयन, देत कृपा की कोर॥
- ब्रज के दोहे
वह अलख, अविनाशी और अगम्य ब्रह्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत, उन भगवान् श्री कृष्ण को श्री राधा ने अपनी आँखों का काजल बना लिया है अथवा उनपर अपनी कृपा-दृष्टि डाल सदा निहाल करती रहती हैं।

