ब्रज समुद्र मथुरा कमल - ब्रज के दोहे

ब्रज समुद्र मथुरा कमल - ब्रज के दोहे

ब्रज समुद्र मथुरा कमल, वृंदावन मकरंद।
ब्रज वनिता सब पुष्प है, मधुकर गोकुलचंद॥

- ब्रज के दोहे

श्री ब्रज मण्डल एक विशाल समुद्र के समान है, जिसमें मथुरा पुरी एक खिले हुए कमल के समान सुशोभित है और श्री वृन्दावन उस कमल का दिव्य मकरंद (पराग-रस) है। ब्रज की समस्त गोपिकाएँ सुन्दर पुष्पों के सदृश हैं और श्री गोकुलचन्द्र (भगवान कृष्ण) उन पर मँडराने वाले रसिक भ्रमर हैं।