धन यौवन यों जायगो, जा विधि उड़त कपूर।
नारायण गोपाल भजि, क्यों चाटे जग धूर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (11)
अरे मन! धन और यौवन ऐसे चले जाएँगे, जैसे कपूर उड़ जाता है। अभी समय है—श्री राधा-कृष्ण का भजन करके अपनी बिगड़ी बना ले; नहीं तो अंत में पछताना पड़ेगा।
नारायण गोपाल भजि, क्यों चाटे जग धूर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (11)
अरे मन! धन और यौवन ऐसे चले जाएँगे, जैसे कपूर उड़ जाता है। अभी समय है—श्री राधा-कृष्ण का भजन करके अपनी बिगड़ी बना ले; नहीं तो अंत में पछताना पड़ेगा।

