'रा' अक्षर को सुनत ही - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (5.5)

'रा' अक्षर को सुनत ही - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (5.5)

'रा' अक्षर को सुनत ही, मोहन होत विभोर।
बसैं निरंतर नाम सो, 'राधा' नित मन मोर॥

- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (5.5)

जिनके नाम का केवल पहला अक्षर “रा” सुनते ही त्रिभुवन-मोहन श्रीकृष्ण के मन में अलौकिक आनंद की लहर दौड़ जाती है, ऐसे पवित्र और सुकुमार “राधा” नाम का मेरे हृदय में अनंतकाल तक निवास बना रहे।