श्री वृन्दावन तोहि करूँ परनाम ।
रँग भरी केलि करत जहँ नित-नित, रँग भरे श्यामा श्याम ।
रँग भरौ जमुना तीर सुहायौ, रँग भरे राजत धाम ॥ [1]
रँग भरे कुंज लता तरु पल्लव, शोभा अति अभिराम ।
रँग भरे खग रंग भरे द्रुमन पै, टेरत राधा नाम ॥ [2]
रँग भरी ललित रागिनी गावत, रँग भरी सहचरी बाम ।
भोरी हृदय रँग में बोरौ, देहु प्रीति निष्काम ॥ [3]
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (145)
जहाँ पर श्री श्यामा श्याम नित्य ही नई-नई केली लीलाएँ करते रहते हैं, ऐसे दिव्य श्री वृंदावन धाम को मैं प्रणाम करता हूँ।
दिव्य श्री वृंदावन धाम के तट पर रमणीय यमुना नित्य ही नए आनंद के साथ प्रवाह हो रहीं है। [1]
यहाँ के कुंज, लताएँ, वृक्ष आदि नित्य ही नए-नए रंग और उत्साह से भरें हैं, जिनकी सोभा अति ही मनमोहने वाली है।
यहाँ के पक्षीगण, ह्रदय में नए रंग और उत्साह के साथ, नए रंग से भरपूर लताओं पर, नित्य ही श्री "राधा" नाम का रटन कर रहे हैं। [2]
सहचरी (श्री राधा की सखियाँ) नित्य ही नए आनंद में अन्य सखियों के साथ मधुर, मधुर वाणी में गा रहीं हैं।
श्री भोरी सखि, प्रेम के नित्य-नए रंगों में प्रमत्त श्री श्यामा श्याम से निस्वार्थ और निष्काम प्रेम और भक्ति के लिए प्रार्थना कर रहीं हैं। [3]
रँग भरी केलि करत जहँ नित-नित, रँग भरे श्यामा श्याम ।
रँग भरौ जमुना तीर सुहायौ, रँग भरे राजत धाम ॥ [1]
रँग भरे कुंज लता तरु पल्लव, शोभा अति अभिराम ।
रँग भरे खग रंग भरे द्रुमन पै, टेरत राधा नाम ॥ [2]
रँग भरी ललित रागिनी गावत, रँग भरी सहचरी बाम ।
भोरी हृदय रँग में बोरौ, देहु प्रीति निष्काम ॥ [3]
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (145)
जहाँ पर श्री श्यामा श्याम नित्य ही नई-नई केली लीलाएँ करते रहते हैं, ऐसे दिव्य श्री वृंदावन धाम को मैं प्रणाम करता हूँ।
दिव्य श्री वृंदावन धाम के तट पर रमणीय यमुना नित्य ही नए आनंद के साथ प्रवाह हो रहीं है। [1]
यहाँ के कुंज, लताएँ, वृक्ष आदि नित्य ही नए-नए रंग और उत्साह से भरें हैं, जिनकी सोभा अति ही मनमोहने वाली है।
यहाँ के पक्षीगण, ह्रदय में नए रंग और उत्साह के साथ, नए रंग से भरपूर लताओं पर, नित्य ही श्री "राधा" नाम का रटन कर रहे हैं। [2]
सहचरी (श्री राधा की सखियाँ) नित्य ही नए आनंद में अन्य सखियों के साथ मधुर, मधुर वाणी में गा रहीं हैं।
श्री भोरी सखि, प्रेम के नित्य-नए रंगों में प्रमत्त श्री श्यामा श्याम से निस्वार्थ और निष्काम प्रेम और भक्ति के लिए प्रार्थना कर रहीं हैं। [3]

