सखी मेरो वृन्दावन सुख धाम - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (113)

सखी मेरो वृन्दावन सुख धाम - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (113)

सखी मेरो वृन्दावन सुख धाम।
प्रियालाल को लाड़ लड़ावत सब विधि पूरन काम।।
महा प्रेम सोभा कौ सागर रोंम रोंम अभिराम।
ललित रसिकवरजू की जीवनि कुंज केलि विश्राम।।

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (113)

हे सखी, मेरा वृन्दावन सुख धाम है । यहाँ रसिक जन नित्य ही प्रियालाल को लाड़ लड़ाते हैं और यह धाम समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है । वृन्दावन धाम महाप्रेम का समुद्र है, एवं यहाँ के रोम रोम में रस समाया हुआ है । श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि रसिकवर की जीवनी मानो वृंदावन की कुंजों में केलि है।