(राग शहानौ)
“वन्दौ श्रीराधा ब्रजचन्द।
जिनके गुणगण अति अपार हैं, गावत वेद भेद बहु छन्द।।”
मैं श्री श्यामा श्याम के चरण कमलों की वंदना करता हूँ जिनकी महिमा अनंत है और जिन्हें वेद भी विभिन्न छन्दों द्वारा गा रहे हैं।
“करत अनेक भांति सों लीला, भक्तजन मन देत अनंद।”
वे अपने भक्त और प्रेमी जनों को आनंद प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार की लीलाएं करते हैं।
“एक वदन सों कहँ लगि वरनें, नारायण मो सम मतिमन्द।।”
श्री नारायण स्वामी कहते हैं, "मैं अपनी एकमात्र जीभ और सीमित बुद्धि के द्वारा दिव्य युगल की महानता का वर्णन कैसे कर सकता हूँ।”
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (3)
“वन्दौ श्रीराधा ब्रजचन्द।
जिनके गुणगण अति अपार हैं, गावत वेद भेद बहु छन्द।।”
मैं श्री श्यामा श्याम के चरण कमलों की वंदना करता हूँ जिनकी महिमा अनंत है और जिन्हें वेद भी विभिन्न छन्दों द्वारा गा रहे हैं।
“करत अनेक भांति सों लीला, भक्तजन मन देत अनंद।”
वे अपने भक्त और प्रेमी जनों को आनंद प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार की लीलाएं करते हैं।
“एक वदन सों कहँ लगि वरनें, नारायण मो सम मतिमन्द।।”
श्री नारायण स्वामी कहते हैं, "मैं अपनी एकमात्र जीभ और सीमित बुद्धि के द्वारा दिव्य युगल की महानता का वर्णन कैसे कर सकता हूँ।”
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (3)

