हमैं इक लाड़िली सौं काम - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमैं इक लाड़िली सौं काम - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमैं इक लाड़िली सौं काम।
लाड़िली कौ ध्यान निशि-दिन, लाड़िली जप नाम।।
लाड़िली ही इष्ट हमरे, लाड़िली धन-धाम।
लाड़िली ही नृपति हमरे, करत झुकी जु सलाम।।
लाड़िली ही प्राण हमरे, लाड़िली सुख-ठाँम।
अलि किशोरी लाड़िली-नातें जु प्यारौ श्याम।।

- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमें तो केवल श्री राधा से ही काम है जो हमारी स्वामिनी हैं।
हर दिन, हर क्षण, हम श्री राधा के रूप का ही चिंतन करते हैं और हम श्री राधा के नाम का ही जप करते हैं।
श्री राधा ही हमारी इष्ट हैं और हमारी प्राण सर्वस्व हैं।
श्री राधा ही हमारी स्वामिनी हैं, जिनके श्री चरणों में हम बारंबार प्रणाम करते हैं।
श्री राधा हमारी प्राण हैं और हमारे सारे सुखों की मूल हैं।
श्री अली किशोरी कहते हैं, ''हमारी प्राण प्यारी श्री श्यामा जु हैं और श्यामा जु के प्राण प्यारे श्री श्यामसुंदर हैं, क्यूँकि श्यामसुंदर हमारी प्यारी जु के प्यारे हैं इसी नाते श्री श्यामसुंदर भी हमको प्यारे हैं।”