मन ! मैं को मत छोड़ तू - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (31)

मन ! मैं को मत छोड़ तू - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (31)

मन ! मैं को मत छोड़ तू, दास जोड़ दे और।
मेरा भी रख साथ में, सो रसिकन सिरमौर॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (31)

हे मन! तू “मैं” को मत छोड़; वरन् “मैं” के आगे “दास” जोड़ दे—“मैं दास हूँ।” “मेरा” भी मत छोड़; वरन् “मेरा” के आगे रसिक-शेखर श्रीकृष्ण जोड़ दे—“मेरे स्वामी।”