बैठत उठत चलत - श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (31)

बैठत उठत चलत - श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (31)

बैठत उठत चलत, श्रीकुंजबिहारी की जिकरि।
वृन्दावन में परि रहै, ना कछु द्वन्द ना फिकरि॥

- श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (31)

समस्त द्वन्द्वों (निंदा-स्तुति आदि) और चिंताओं से परे रहकर उठते-बैठते, चलते-फिरते सदा श्री बांके बिहारी महाराज की चर्चा करते हुए श्रीवृन्दावन में पड़े रहना चाहिए।