जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुख धाम।
चरण सरण निज दीजिऔं, सुन्दर सुखद ललाम॥
- ब्रज के दोहे
हे कृष्ण-प्रिया श्री राधा! हे सुख की धाम! मैं जैसा भी हूँ, भला या बुरा, जैसा भी हूँ, निश्चित ही मैं आपका हूँ। कृपा करके मुझे अपने उन सुन्दर, सुखदायक और परम मनोहर चरणों की शरण प्रदान कीजिए। आपकी शरण ही इस जीव का एकमात्र परम आश्रय है।
चरण सरण निज दीजिऔं, सुन्दर सुखद ललाम॥
- ब्रज के दोहे
हे कृष्ण-प्रिया श्री राधा! हे सुख की धाम! मैं जैसा भी हूँ, भला या बुरा, जैसा भी हूँ, निश्चित ही मैं आपका हूँ। कृपा करके मुझे अपने उन सुन्दर, सुखदायक और परम मनोहर चरणों की शरण प्रदान कीजिए। आपकी शरण ही इस जीव का एकमात्र परम आश्रय है।

