(कवित्त)
अतर पुतायो चौक चन्दन लिपायो,
बिछी गिलाम गलीचन की पंगत प्रमान की। [1]
काली पीली हरी लाल झालरे झलक रहीं,
जैसे छविछाई चारू चाँदनी वितान की॥ [2]
झीनी श्वेत सारी जड़ी मोतिन किनारीदार,
फैली मुख आभा हठी राधे सुख दान की। [3]
नाह नेह नद्दी कर रमा रूप रद्दी कर,
बैठी आन गद्दी पर बेटी वृषभानु की॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (10)
जिस आंगन में श्री राधा विराजमान हैं, वहाँ फूलों के रस और चंदन का लेप किया गया है। नरम कालीन और गलीचे फर्श पर फैले हुए हैं। [1]
आंगन को काले, पीले, हरे और लाल रंग की चमकीली झालरों से सजाया गया है, जो अत्यंत सुंदरता से चमक रही हैं और चंद्रमा की किरणों की प्यारी रोशनी को भी परास्त कर रही हैं। [2]
उनकी सफेद वर्ण की साड़ी अत्यंत महीन कपड़े से बनी है, जिसका किनारा मोतियों से गुंथा हुआ है। श्री हठीजी कहते हैं, “श्री राधा के मुख से निकलने वाला प्रकाश पुंज कितना प्यारा है, जो समस्त आनंद प्रदान करने वाला है।” [3]
इनके समक्ष सृष्टि का सम्पूर्ण प्रेम सारहीन प्रतीत होता है, और इनकी सुंदरता पूर्ण रूप से लक्ष्मीजी को परास्त कर रही है। वह श्री वृषभानुजी की बेटी श्री राधा, अपने सिंहासन पर विराजमान हैं। [4]
अतर पुतायो चौक चन्दन लिपायो,
बिछी गिलाम गलीचन की पंगत प्रमान की। [1]
काली पीली हरी लाल झालरे झलक रहीं,
जैसे छविछाई चारू चाँदनी वितान की॥ [2]
झीनी श्वेत सारी जड़ी मोतिन किनारीदार,
फैली मुख आभा हठी राधे सुख दान की। [3]
नाह नेह नद्दी कर रमा रूप रद्दी कर,
बैठी आन गद्दी पर बेटी वृषभानु की॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (10)
जिस आंगन में श्री राधा विराजमान हैं, वहाँ फूलों के रस और चंदन का लेप किया गया है। नरम कालीन और गलीचे फर्श पर फैले हुए हैं। [1]
आंगन को काले, पीले, हरे और लाल रंग की चमकीली झालरों से सजाया गया है, जो अत्यंत सुंदरता से चमक रही हैं और चंद्रमा की किरणों की प्यारी रोशनी को भी परास्त कर रही हैं। [2]
उनकी सफेद वर्ण की साड़ी अत्यंत महीन कपड़े से बनी है, जिसका किनारा मोतियों से गुंथा हुआ है। श्री हठीजी कहते हैं, “श्री राधा के मुख से निकलने वाला प्रकाश पुंज कितना प्यारा है, जो समस्त आनंद प्रदान करने वाला है।” [3]
इनके समक्ष सृष्टि का सम्पूर्ण प्रेम सारहीन प्रतीत होता है, और इनकी सुंदरता पूर्ण रूप से लक्ष्मीजी को परास्त कर रही है। वह श्री वृषभानुजी की बेटी श्री राधा, अपने सिंहासन पर विराजमान हैं। [4]

