राधा नाम सुधारसं रसयितुं जिद्वास्तु मे विह्वला - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (141)

राधा नाम सुधारसं रसयितुं जिद्वास्तु मे विह्वला - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (141)

राधा नाम सुधारसं रसयितुं जिद्वास्तु मे विह्वला, पादौ तत्पदकाङ्कितासुचरतां वृन्दाटवी-वीथिषु।
तत्कर्मैव कर: करोतु हृदयं तस्याः पदं ध्यायतात्तद्भावोत्सवतः परं भवतु मे तत्प्राण नाथे रतिः॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (141)

मेरी जिह्वा धीराधा-नामामृत-रस के आस्वादनार्थ सदा विह्वल (लालचवती) रही आवे। चरण श्रीराधा-पादाङ्कित वृन्दावन-वीथियों में ही विचरण करते रहें। दोनों हाथ उनके सेवा कार्यों में ही लगे रहें। हृदय सदा उनके मञ्जुल चरण-कमलों का ही ध्यान करता रहे एवं उन्हीं श्रीराधा के रस-भावोत्सव-सहित श्रीराधा-प्राणनाथ लालजी में मेरी परम प्रीति हो।