कदम कुंज ह्वै हो कबै, श्री वृन्दावन माँहि।
ललित किशोरी लाड़िले, विहरंगे तिहि छाँहि॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (53)
मैं कब श्री वृन्दावन की कुंजों में कदम्ब का वृक्ष बनूँगा जिसकी शीतल छाया में प्रिया-प्रियतम अपनी दिव्य केलि-क्रीड़ा और विहार करेंगे।
ललित किशोरी लाड़िले, विहरंगे तिहि छाँहि॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (53)
मैं कब श्री वृन्दावन की कुंजों में कदम्ब का वृक्ष बनूँगा जिसकी शीतल छाया में प्रिया-प्रियतम अपनी दिव्य केलि-क्रीड़ा और विहार करेंगे।

