कहा त्रिलोकी जस किये - श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (34)

कहा त्रिलोकी जस किये - श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (34)

कहा त्रिलोकी जस किये, कहा त्रिलोकी दान।
कहा त्रिलोकी बस किये, जु करी न भक्ति निदान॥

-श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (34)

यदि त्रिलोक प्राप्त कर लिया, तो भी क्या हुआ? यदि त्रिलोक दान कर दिया, तो क्या हुआ? यदि त्रिलोक को वश में भी कर लिया, तो क्या हुआ? यदि भक्ति न की, तो कुछ भी काम नहीं आने वाला—सब व्यर्थ है, सब बेकार है।