(राग केदारौ)
ऐसी तौ बिचित्र जोरी बनी।
ऐसी कहूँ देखी सुनी न भनी॥
मनहुँ कनक सुदाह करि करि देह अद्भुत न ठनी।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम तमालै उछंगि बैठी धनी॥
- ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (31)
दिव्य वृन्दावन के निकुंज में प्रिया-प्रियतम की विचित्र जोड़ी अति शोभायमान है मानों श्याम तमाल पर कंचन बेलि श्यामा जी लिपटी हुई हैं। इस शोभा को निरख सखी हरिदास जी बोली-ऐसी विचित्र अद्भुत जोड़ी अपने अंगों में नयी-नयी उमंग लिए विराज रही है। ऐसी छवि पूर्व में कभी देखी न सुनी ।
ऐसी तौ बिचित्र जोरी बनी।
ऐसी कहूँ देखी सुनी न भनी॥
मनहुँ कनक सुदाह करि करि देह अद्भुत न ठनी।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम तमालै उछंगि बैठी धनी॥
- ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (31)
दिव्य वृन्दावन के निकुंज में प्रिया-प्रियतम की विचित्र जोड़ी अति शोभायमान है मानों श्याम तमाल पर कंचन बेलि श्यामा जी लिपटी हुई हैं। इस शोभा को निरख सखी हरिदास जी बोली-ऐसी विचित्र अद्भुत जोड़ी अपने अंगों में नयी-नयी उमंग लिए विराज रही है। ऐसी छवि पूर्व में कभी देखी न सुनी ।

