नाम लिये भव ताप कटैं,
कलिकाल कूँतेज कटार हैं राधे।
ध्यान धरें दुख द्वन्द मिटैं,
गऊ लोकहिं नित्त बिहारी हैं राधे॥
राजत फूलन के बंगला,
बन बल्लभ जू गल हार हैं राधे।
भाव बिभोर सु गान करैं,
'कवि नन्दन' की पतवार हैं राधे॥
- श्री नन्दन जी
श्री राधा का नाम उच्चारण करने मात्र से संसार के समस्त कष्ट मिट जाते हैं और कलिकाल के प्रचंड प्रभाव के तेज नष्ट हो जातें हैं। उनका ध्यान करने से संसार के द्वंद मिट जाते हैं और वह स्वयं श्री कृष्ण के गोलोक की नित्य बिहारिणी हैं। अति सुंदर फूलों का बंगला सजा है जिसमें श्री राधाकृष्ण विराज रहे हैं और श्री राधा श्री कृष्ण के गले का हार बनी हैं। कवि श्री नंदन जी भाव विभोर होकर श्री राधा के गुणों को गा रहे हैं और कह रहे हैं कि "हमारे संसार की नाव को पार करने की पतवार एकमात्र श्री राधा ही हैं।"
कलिकाल कूँतेज कटार हैं राधे।
ध्यान धरें दुख द्वन्द मिटैं,
गऊ लोकहिं नित्त बिहारी हैं राधे॥
राजत फूलन के बंगला,
बन बल्लभ जू गल हार हैं राधे।
भाव बिभोर सु गान करैं,
'कवि नन्दन' की पतवार हैं राधे॥
- श्री नन्दन जी
श्री राधा का नाम उच्चारण करने मात्र से संसार के समस्त कष्ट मिट जाते हैं और कलिकाल के प्रचंड प्रभाव के तेज नष्ट हो जातें हैं। उनका ध्यान करने से संसार के द्वंद मिट जाते हैं और वह स्वयं श्री कृष्ण के गोलोक की नित्य बिहारिणी हैं। अति सुंदर फूलों का बंगला सजा है जिसमें श्री राधाकृष्ण विराज रहे हैं और श्री राधा श्री कृष्ण के गले का हार बनी हैं। कवि श्री नंदन जी भाव विभोर होकर श्री राधा के गुणों को गा रहे हैं और कह रहे हैं कि "हमारे संसार की नाव को पार करने की पतवार एकमात्र श्री राधा ही हैं।"

