(सवैया)
नाम लिये भव ताप कटैं, कलिकाल कूँतेज कटार हैं राधे। [1]
ध्यान धरें दुख द्वन्द मिटैं, गऊ लोकहिं नित्त बिहारी हैं राधे॥ [2]
राजत फूलन के बंगला, बन बल्लभ जू गल हार हैं राधे। [3]
भाव बिभोर सु गान करैं, 'कवि नन्दन' की पतवार हैं राधे॥ [4]
- श्री नन्दन जी
श्री राधा नाम के उच्चारण मात्र से संसार के समस्त संताप मिट जाते हैं और यह कलिकाल के प्रभाव को काटने वाली तीक्ष्ण कटार के समान है। [1]
उनका ध्यान करने से जीवन के समस्त दुख और द्वंद्व दूर हो जाते हैं तथा वे गोलोक में नित्य विहार करने वाली परम स्वामिनी हैं। [2]
वे पुष्पों से सजे सुंदर बंगले में सुशोभित होती हैं और अपने प्राणप्रिय श्री कृष्ण (वल्लभ) के गले का हार हैं। [3]
भाव में विभोर होकर जो उनका सुंदर गान करता है, श्री नंदन जी कहते हैं कि उसके लिए श्री राधा ही भवसागर से पार उतारने वाली पतवार हैं। [4]
नाम लिये भव ताप कटैं, कलिकाल कूँतेज कटार हैं राधे। [1]
ध्यान धरें दुख द्वन्द मिटैं, गऊ लोकहिं नित्त बिहारी हैं राधे॥ [2]
राजत फूलन के बंगला, बन बल्लभ जू गल हार हैं राधे। [3]
भाव बिभोर सु गान करैं, 'कवि नन्दन' की पतवार हैं राधे॥ [4]
- श्री नन्दन जी
श्री राधा नाम के उच्चारण मात्र से संसार के समस्त संताप मिट जाते हैं और यह कलिकाल के प्रभाव को काटने वाली तीक्ष्ण कटार के समान है। [1]
उनका ध्यान करने से जीवन के समस्त दुख और द्वंद्व दूर हो जाते हैं तथा वे गोलोक में नित्य विहार करने वाली परम स्वामिनी हैं। [2]
वे पुष्पों से सजे सुंदर बंगले में सुशोभित होती हैं और अपने प्राणप्रिय श्री कृष्ण (वल्लभ) के गले का हार हैं। [3]
भाव में विभोर होकर जो उनका सुंदर गान करता है, श्री नंदन जी कहते हैं कि उसके लिए श्री राधा ही भवसागर से पार उतारने वाली पतवार हैं। [4]

