बात बनावै ज्ञान की, भोगन को ललचात।
नारायण कलिकाल के, कौतुक कहे न जात॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (33)
कलियुग के चमत्कार तो देखो—बातें तो ज्ञान की करते हैं, परन्तु भोगों में आसक्त होकर ललचाते रहते हैं।
नारायण कलिकाल के, कौतुक कहे न जात॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (33)
कलियुग के चमत्कार तो देखो—बातें तो ज्ञान की करते हैं, परन्तु भोगों में आसक्त होकर ललचाते रहते हैं।

