वृन्दावनं परित्यज्य नैव गच्छामि अहं क्वचित् - सनत्कुमार संहिता (36.165)

वृन्दावनं परित्यज्य नैव गच्छामि अहं क्वचित् - सनत्कुमार संहिता (36.165)

वृन्दावनं परित्यज्य नैव गच्छामि अहं क्वचित् ।
निवसाम्यनया सार्ध - महमत्रैव सर्वदा ॥

- सनत्कुमार संहिता (36.165)

श्री कृष्ण कहते हैं कि वृंदावन धाम को छोड़कर मैं कभी भी कहीं नहीं जाता हूँ, यहाँ ही श्री राधा के संग नित्य निवास करता हूँ।