(राग नट)
राधे तेरे नैन किधौं बटपारे।
तिहि देखे बन के मृग मोहे मानुस कौन विचारे॥
अंजन है पिय को मन मोह्यो खंजन मीन लजारे।
चितवन दृष्टि बान भरि मारत घूमत ज्यौं मतवारै॥
गिरधर रूप दियौ सब तोकों कहिये तिन्हें कहारे।
सूरदास प्रभु दरशन कारन नाचत ज्यों मतवारे॥
- श्री सूरदास जी
हे श्री राधे, यह आपकी आंखें है या बाण। इन्हें देख कर वन के मृग मोहित हो रहे हैं, तो मनुष्य की कौन कहे। आपकी आंखों में लगे काजल को देख श्री श्यामसुंदर मोहित हो रहे हैं और खंजन (कटार) एवं मीन (मछली) लज्जित हो रहे हैं। आपके खंजन की भांति आंखों की कटाक्ष से घायल श्री श्यामसुंदर मतवारे बने डोल रहे हैं। श्री श्यामसुंदर ने अपनी संपूर्ण सुंदरता को आप पर न्योछावर कर दिया है और आपकी दर्शनों की एक झलक पाने के लिए मतवारे से नाचते फिर रहे हैं।
राधे तेरे नैन किधौं बटपारे।
तिहि देखे बन के मृग मोहे मानुस कौन विचारे॥
अंजन है पिय को मन मोह्यो खंजन मीन लजारे।
चितवन दृष्टि बान भरि मारत घूमत ज्यौं मतवारै॥
गिरधर रूप दियौ सब तोकों कहिये तिन्हें कहारे।
सूरदास प्रभु दरशन कारन नाचत ज्यों मतवारे॥
- श्री सूरदास जी
हे श्री राधे, यह आपकी आंखें है या बाण। इन्हें देख कर वन के मृग मोहित हो रहे हैं, तो मनुष्य की कौन कहे। आपकी आंखों में लगे काजल को देख श्री श्यामसुंदर मोहित हो रहे हैं और खंजन (कटार) एवं मीन (मछली) लज्जित हो रहे हैं। आपके खंजन की भांति आंखों की कटाक्ष से घायल श्री श्यामसुंदर मतवारे बने डोल रहे हैं। श्री श्यामसुंदर ने अपनी संपूर्ण सुंदरता को आप पर न्योछावर कर दिया है और आपकी दर्शनों की एक झलक पाने के लिए मतवारे से नाचते फिर रहे हैं।

