राधा राधा जे कहैं, ते न परे भव-फंद।
जासु कंध पर कमलकर, धरे रहत ब्रजचंद॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (4)
जो भी जीव “राधा-राधा” कहता है, वह संसार के जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है, क्योंकि ब्रज-बिहारी श्रीकृष्ण अपना कमल-हस्त उसके कंधे पर नित्य रखते हैं।
जासु कंध पर कमलकर, धरे रहत ब्रजचंद॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (4)
जो भी जीव “राधा-राधा” कहता है, वह संसार के जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है, क्योंकि ब्रज-बिहारी श्रीकृष्ण अपना कमल-हस्त उसके कंधे पर नित्य रखते हैं।

