न तत्पदं चागति परं - सनत्कुमार सम्हिता (32.38)

न तत्पदं चागति परं - सनत्कुमार सम्हिता (32.38)

न तत्पदं चागति परं तस्मात्सेव्यं परात्परम् ।
नातः परतरं किञ्चिल्लोके वै विद्यते ध्रुवम् ॥

-सनत्कुमार सम्हिता (32.38)

श्रीवृन्दावन धाम ही परात्पर धाम है। उससे बढ़कर कोई और दूसरा काम नहीं। वहाँ पहुँचने पर पतन नहीं होता, इसलिये सदा वृंदावन का ही ध्यान और सेवन करना चाहिये।