श्री राधिका समाविष्ट गोपीचरन रेनव: - श्री विट्ठल नाथ जी

श्री राधिका समाविष्ट गोपीचरन रेनव: - श्री विट्ठल नाथ जी

श्री राधिका समाविष्ट गोपीचरन रेनव:।
निजाचार्यपदाम्भोजा दासं कुर्वन्तु माम सदा॥
- श्री विट्ठल नाथ जी

मेरे ह्रदय की यह प्रार्थना है कि श्री राधिका को चारों ओर से घेरने वाली सभी सखियों के चरणों की धूल मुझे श्री आचार्यजी के (उनकी एक और एकमात्र स्वामीनी श्री राधा) के चरण कमलों की सेवा प्राप्त कराएगी।