राधादास्य लसद् वपुरनिशं - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.116)

राधादास्य लसद् वपुरनिशं - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.116)

राधादास्य लसद् वपुरनिशं राधापद-सेवी।
अन्तस्तोषित राधारसिको राधावने सदा निवस।।

- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.116)

श्रीराधा दास्य-उपयोगी उज्ज्वल शरीर को पाकर नित्य श्रीराधा पादपद्म से सेवापरायण होकर श्रीराधा रसिक श्री श्यामसुन्दर को संतोषित करते हुए नित्य श्रीवृन्दावन में वास कर।