भींजन लागे री दोऊ जन - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (93)

भींजन लागे री दोऊ जन - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (93)

(राग मलार)
भींजन लागे री दोऊ जन।
अँचरा की ओट करत दोऊ जन॥
अति उन्मत्त रहत निसि बासर,
राग ही के रंग रंगे दोऊ जन।
श्री हरिदास के स्वामी स्याम
प्रेम परस्पर नृत्य करत दोऊ जन॥

- ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (93)

श्री वृन्दावन की हरी भरी भूमि में दोनों प्रिया प्रियतम अनुराग रंग में रंगे नृत्य कर रहे हैं। प्रिया जी के अंग में सुंदर रंग की साड़ी शोभायमान हो रही है। दोनों प्रिया-प्रियतम परस्पर उन्मत्तता के रस में भींज रहे हैं। दोनों के मन हर्षित हैं। अपने अपने अंगों रूपी आँचल से प्रेम क्रीड़ा कर रहे हैं। यह सुंदर दिव्य जोड़ी हर क्षण उन्मत्ता को प्राप्त है। श्री हरिदास जी महाराज कहते हैं कि श्यामा-श्याम नृत्य कला में निपुण प्रेम के वशीभूत होकर नृत्य कर रहे हैं जिसकी शोभा देखते ही बनती है।