कीरति, कीरति कुँवरि की, कहि कहि थके गणेश।
दस सत मुख बरनन करत, पार न पावत शेष॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (2)
भगवान गणेश कीर्ति-कुमारी श्री राधारानी की महिमा का गान करते-करते थक गए। शेषजी ने सहस्र मुख पाकर भी उनकी महिमा गानी चाही, परंतु पार नहीं पा सके।
दस सत मुख बरनन करत, पार न पावत शेष॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (2)
भगवान गणेश कीर्ति-कुमारी श्री राधारानी की महिमा का गान करते-करते थक गए। शेषजी ने सहस्र मुख पाकर भी उनकी महिमा गानी चाही, परंतु पार नहीं पा सके।

