साँचो दास न कबहुँ चह, पाँचहुँ मुक्ति बलाय।
चहइ युगल सेवा सदा, तिन सुख सुखी सदाय॥
- जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (15)
सच्चा दास केवल युगल-सरकार की सेवा ही चाहता है और उनके सुख में ही सुखी रहता है तथा पाँचों प्रकार की मुक्तियों को स्वप्न में भी नहीं चाहता।
चहइ युगल सेवा सदा, तिन सुख सुखी सदाय॥
- जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (15)
सच्चा दास केवल युगल-सरकार की सेवा ही चाहता है और उनके सुख में ही सुखी रहता है तथा पाँचों प्रकार की मुक्तियों को स्वप्न में भी नहीं चाहता।

