राधा श्री राधा रटूँ, नित नित आठौ याम।
जा उर श्री राधा बसैं, वही हमारौ धाम॥
- ब्रज के दोहे
श्रीकृष्ण कहते हैं, “मैं नित्य ही आठों याम ‘राधा-राधा’ का जप करता हूँ। मैं केवल उसी हृदय में निवास करता हूँ, जिस हृदय में राधा बसती हैं।”
जा उर श्री राधा बसैं, वही हमारौ धाम॥
- ब्रज के दोहे
श्रीकृष्ण कहते हैं, “मैं नित्य ही आठों याम ‘राधा-राधा’ का जप करता हूँ। मैं केवल उसी हृदय में निवास करता हूँ, जिस हृदय में राधा बसती हैं।”

