चतुरदास चित चौंप सों - श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (1)

चतुरदास चित चौंप सों - श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (1)

चतुरदास चित चौंप सों, करि वृंन्दावन बास।
काम केलि निरखत रहे, और न दूजी आस॥

- श्री चतुर दास, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (1)

श्री चतुरदास जी के अनुसार, हृदय में परम उल्लास संजोकर श्री वृन्दावन धाम में निवास करना चाहिए और निरंतर युगल सरकार के दिव्य केलि-विहार का दर्शन करना चाहिए। इस विशुद्ध नित्य-विहार के रसास्वादन के अतिरिक्त अंतःकरण में अन्य कोई भी सांसरिक अथवा आध्यात्मिक अभिलाषा शेष नहीं रहनी चाहिए।